Friday, 30 December 2016

दोस्तों इस कहानी को जरुर पढ़ें और शेयर करें

"....ये कहानी इक ऐसे व्यक्ति की है ,जो एक फ्रीजर प्लांट में काम करता था...
वह दिन का अंतिम समय था व् सभी घर जाने को तैयार थे... तभी प्लांट में एक
तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गयी, और वह उसे दूर करने में जुट गया....

.... जब तक वह कार्य पूरा करता तब तक अत्यधिक देर हो गयी...

दरवाजे सील हो चुके थे 🚪व्
लाईटें 💡बुझा दी गईं.....
😳😳😳

.... बिना हवा व् प्रकाश के पूरी रात आइस प्लांटमें फसें रहने के कारण उसकी बर्फीली कब्रगाह बनना तय था...

घण्टे बीत गए... 🕙... तभी उसने किसी को दरवाजा खोलते पाया....

...क्या यह इक चमत्कार था..?!?
सिक्यूरिटी गार्ड टोर्च 🔦लिए खड़ा था... व् उसने उसे बाहर निकलने में 🏃मदद की...

.... वापस आते समय उस व्यक्तिने सेक्युर्टी गार्ड से पूछा :
"...आपको कैसे पता चला कि मै भीतर हूँ.....?!? "

गार्ड ने उत्तर दिया :
"... सर, इस प्लांट में 50 लोग कार्य करते हैँ...पर सिर्फ एक आप हैँ, जो सुबह मुझे " नमस्कार" व् शाम को जाते समय " फिर मिलेंगे " कहते हैँ...

....आज सुबह आप ड्यूटी पर आये थे पर शाम को आप बाहर नही गए.... इससे मुझे शंका हुई और मैं देखने चला आया....

... वह व्यक्ति नही जानता था कि उसका किसी को छोटा सा सम्मान देना कभी उसका जीवन बचाएगा...

.... याद रखेँ, जब भी आप किसी से मिलते हैं, तो उसका गर्मजोश मुस्कुराहट के साथ सम्मान करें....
.... हमें नहीं पता.., पर हो सकता है कि ये आपके
जीवन में भी चमत्कार दिखा दे

अच्छा लगे तो आगे बढ़ाये...!!!

"...जिन्दगी में दो चीजें कभl मत कीजिए.....

झूठे आदमी के साथ "प्रेम"
और
सच्चे आदमी के साथ
" गेम " ।
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Thank you so much for your sharing Usha Kiran jee

Thursday, 29 December 2016

ज़िन्दगी के 10 सबक


अभिषेक की दादा जी उसे बहुत मानते थे और बचपन से ही उसका ख़याल रखते थे। दादा जी की एक आदत थी कि वे हमेशा अपने साथ एक डायरी लेकर चलते थे। अभिषेक अक्सर उन्हें ऐसा करते देखता और पूछता, “दादा जी…बताइए न आप इस पर क्या लिखते हैं?”
दादा जी उसकी बात हँस कर टाल देते और कहते, “तू नहीं समझेगा…”'

अभिषेक अब बड़ा हो चुका था और दादा जी करीब 90 वर्ष की हो चुके थे। उस रात भी सभी लोगों ने साथ खाना खाया और अपने-अपने कमरों में सोने चले गए…..पर दादा जी ने अगली सुबह नहीं देखी…उनका देहांत हो चुका था।
अभिषेक के लिए ये किसी सदमे से कम नहीं था, वह फूट-फूट कर रोया, दादा जी के साथ बिताया एक-एक पल उसकी आँखों के सामने से गुजरने लगा!
अंतिम संस्कार के बाद जब अभिषेक उनके कमरे में गया तो उसकी नज़र उस डायरी पर पड़ी…अभिषेक पन्ने पलटने लगा… आखिरी पन्ने पर लिखा था:
ये मेरे लाडले अभिषेक के लिए—

अभिषेक ने पढना शुरू किया-
बेटा अभिषेक
तू  हेमशा पूछता था न मैं इस डायरी में क्या लिखता हूँ….तो आज मैं तुम्हे कुछ बताना चाहता हूँ….आज मैं तुम्हे अपने जीवन के अनुभव का निचोड़ देना चाहता हूँ….मेरे जाने के बाद तुम इन 10 बातों को ध्यान से पढना और इसे अपने जीवन में अपनाना…तुम ज़िन्दगी के असल मायने समझ पाओगे—-

1. प्यार और समझ के साथ चीजों को स्वीकार करो 

इससे मतलब नहीं है कि तुम कहाँ हो, या क्या कर कर रहे हो, हमेशा यकीन रखो कि सुरंग के अंत में प्रकाश होगा। परिस्थितियों को control करने के लिए जो कर सकते हो करो, लेकिन अंत में जो भी result आये उसे स्वीकार करो, क्योंकि वे तुम्हारे हाथ में नहीं होते…जो भी हुआ है उसे ऐसे ही होना था!

2. Life बहुत simple होते हुए भी सुखद हो सकती है

बहुत बार तुम्हे लगता है कि ज़िन्दगी बहुत जटिल है लेकिन ये हमेशा सिम्पल हो सकती है। बस तुम्हे इतना ही करना है कि एक समय में एक ही काम करना है। तुम्हे एक साथ बहुत सारी चीजें नहीं करनी हैं…तुम ज़िन्दगी में जो कुछ भी डालोगे वो तुम्हे इंटरेस्ट के साथ उसे लौटा देगी। खुशियों चीजों में नहीं होतीं वो तुम्हारे भीतर होती हैं।

3. औरों के लिए खुद को बदलो नहीं

सिर्फ इसलिए अपने आप को मत बदलो क्योंकि तुम जैसे हो उस रूप में लोग तुम्हे अपनाते नहीं। तुम unique हो अपनी यूनीकनेस…अपनी विशिष्टता को खो मत। हेमशा वही बोलो जो तुम सचमुच अन्दर से सोचते हो, भले इससे हर कोई वास्ता ना रखता हो। जब तुम खुद से सच्चे रहते हो तब तुम इस दुनिया को सुन्दर बनाते हो- वो सुन्दरता जो पहले नहीं थी।

 4. तुम वो नहीं हो जो तुम थे- और इसमें कोई बुराई नहीं है

हम रोज कुछ नया सीखते हैं जो हमें किसी न किसी रूप मे बदल देता है… और हमें एक दिन एहसास होता है कि हम वाकई में बदल गए हैं। ये बिलकुल natural है इसलिए कभी इसके लिए अफ़सोस मत करना। बदलाव प्रकृति का नियम है।

 5. जो होता है अच्छे के लिए होता है!

हमारे साथ जो कुछ भी होता है वो आज हमें चाहे जैसा लगे पर बाद में पता चलता है कि वो हमारे भले की लिए ही था। ज़िन्दगी तुम्हे कई जगह ले जायेगी, अलग-अलग अनुभव कराएगी…खट्टे-मीठे हर तरह के अनुभव…ये सब बातें तुम्हे grow करने में मदद करेंगी। इसलिए कभी निराशा में मत डूबना.. हमारे साथ वही होता है जो हमारे साथ सबसे अच्छा हो सकता है।

6. खुशियाँ चुनो, पैसे नहीं

बहुत लोग ये सोचते हैं कि पैसा उनके जीवन में खुशियाँ ला सकता है, लेकिन दौलत का पीछा करने का कोई मतलब नहीं। हाँ, पैसा ज़रूरी है लेकिन बस उसी के पीछे भागते रहना एक बहुत बड़ी गलती! हर एक निर्णय में पहले खुशियों को देखो बाद में बैंक बैलेंस।  इस तरह, जब तुम बूढ़े होगे तो तुम चीजों की असल कीमत जानोगे उनकी मॉनिटरी वैल्यू नहीं। तब तुम समझोगे कि ज़िन्दगी की सबसे कीमती चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें पैसा नहीं खरीद सकता।

 7. निश्चय करो कि तुम पॉजिटिव रहोगे

ज़िन्दगी के बारे में एक बहुत ज़रूरी चीज जो तुम्हे समझनी चाहिए वो ये कि अगर तुम  खुश नहीं हो, तो ये परिस्थितयों की वजह से नहीं है, बल्कि तुम्हारे खुश ना रहने के निर्णय की वजह से है। हर बार जब ज़िन्दगी तुम्हारे रास्ते में बाधा डाले, तो एक बड़ी सी मुस्कान दो, उसकी मौजूदगी स्वीकार करो और हँसते हुए उसे पार करो। खुश रहने का निर्णय लो और चाहे जो हो जाए अपने निर्णय पर अडिग रहो.. यही खुश रहने का रहस्य है।

8. जिन लोगों से तुम प्यार करते हो, उनपर पूरा ध्यान दो

हो सकता है कि हेमशा साथ रहने के कारण तुम उन लोगों को for granted लेने लगो जिनसे तुम सबसे ज्यादा प्रेम करते हो। जब तुम अपने किसी करीबी से पूछो कि, “ वो कैसा है?”, तो बस “ok” सुनकर आगे मत बढ़ जाओ, उसकी आँखों में देखो और पूछो, उसका दिन कैसा गया, और वो कैसा feel कर रहा है। अगर तुम्हे ऐसा लगता है कि तुम्हारे दोस्त बस तुम्हे ज़रुरत में याद करते हैं तो चिंता मत करो, खुश रहो कि तुम उनके लिए एक उम्मीद की किरण के समान हो।

9. कभी-कभी कुछ लोगों को पीछे छोड़ना पड़ता है

Unfortunately,  ज़िन्दगी में टकराने वाले सभी लोग अच्छे नहीं होते। कुछ मामलों में वे हमारी growth को interrupt करते हैं। जब जान जाओ कि कोई व्यक्ति तुम्हारे लिए सही नहीं है तो मजबूरी में उससे चिपके मत रहो… एक tough decision लो और आगे बढ़ जाओ।

10. हर एक ending….happy ending नहीं होती!

Setbacks, या फेलियर लाइफ का हिस्सा हैं….ज़रूरी नहीं कि तुमने जो कुछ भी शुरू किया उसका एक सुखद अंत हो। इसलिए जब बहुत प्रयास करने पर भी हैप्पी एंडिंग ना हो तो बेहतर होगा कि तुम एक New Beginning करो। कभी भी पुराना सबकुछ छोड़ कर नया शुरू करने से डरो मत, चाहे तुम उम्र के किसी भी पड़ाव पर हो।

तुम्हारे, 

दादाजी 

Wednesday, 21 December 2016

दिल छूने वाली कहानी....

एक बार की बात है एक जंगल में सेब
का एक बड़ा पेड़ था। एक बच्चा रोज उस पेड़
पर खेलने आया करता था। वह कभी पेड़ की
डाली से लटकता कभी फल
तोड़ता कभी उछल कूद करता था, सेब
का पेड़ भी उस बच्चे से काफ़ी खुश रहता
था। कई साल इस तरह बीत गये। अचानक एक
दिन
बच्चा कहीं चला गया और फिर लौट के नहीं
आया, पेड़ ने उसका काफ़ी इंतज़ार किया पर
वह नहीं आया। अब तो पेड़ उदास हो गया ।
काफ़ी साल बाद वह बच्चा फिर से पेड़ के
पास आया पर वह अब कुछ बड़ा हो गया था।
पेड़
उसे देखकर काफ़ी खुश हुआ और उसे अपने साथ
खेलने के लिए कहा।
पर बच्चा उदास होते हुए
बोला कि अब वह बड़ा हो गया है अब वह उसके
साथ नहीं खेल सकता। बच्चा बोला की अब
मुझे खिलौने से खेलना अच्छा लगता है पर
मेरे पास खिलौने खरीदने के लिए पैसे नहीं
है। पेड़ बोला उदास ना हो तुम मेरे फल तोड़
लो और उन्हें बेच कर खिलौने खरीद लो।
बच्चा खुशी खुशी फल तोड़ के ले गया लेकिन
वह फिर बहुत दिनों तक वापस नहीं आया। पेड़
बहुत दुखी हुआ। अचानक बहुत दिनों बाद
बच्चा जो अब जवान हो गया था वापस
आया,
पेड़ बहुत खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने
के लिए कहा पर लड़के
ने कहा कि वह पेड़ के साथ नहीं खेल सकता
अब मुझे कुछ पैसे चाहिए क्यूंकी मुझे अपने
बच्चों के लिए घर बनाना है। पेड़ बोला मेरी
शाखाएँ बहुत मजबूत हैं
तुम इन्हें काट कर ले जाओ और अपना घर
बना लो। अब लड़के ने खुशी खुशी सारी
शाखाएँ काट डालीं और लेकर चला गया।
वह फिर कभी वापस नहीं आया।
बहुत दिनों बात जब वह वापस आया तो बूढ़ा
हो चुका था पेड़ बोला मेरे साथ खेलो पर वह
बोला की अब में बूढ़ा हो गया हूँ अब नहीं
खेल सकता।
पेड़ उदास होते हुए
बोला की अब मेरे पास ना फल हैं और
ना ही लकड़ी अब मै तुम्हारी मदद
भी नहीं कर सकता। बूढ़ा बोला की अब उसे
कोई सहायता नहीं चाहिए बस एक
जगह चाहिए जहाँ वह बाकी जिंदगी आराम
से
गुजार सके। पेड़ ने उसे अपने जड़ मे पनाह दी
और बूढ़ा हमेशा वहीं रहने लगा।
मित्रों इसी पेड़ की तरह हमारे माता पिता
भी होते हैं, जब हम छोटे होते हैं तो उनके
साथ खेलकर बड़े होते हैं और बड़े होकर
उन्हें छोड़ कर चले जाते हैं और तभी वापस
आते हैं ,जब हमें कोई ज़रूरत होती है।
धीरे धीरे ऐसे ही जीवन बीत जाता है। हमें
पेड रूपी माता पिता की सेवा करनी
चाहिए
ना कि सिर्फ़ उनसे
फ़ायदा लेना चाहिए।
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ऐ युवा! छोड़ असंभव शब्द को

बनो परम पुरुषार्थी, बनो तेज बलवान।
बनो धीरगंभीर तू, होवो सबसे महान।

पराकाष्ठा वीरत्व की, छू लो देश के वीर।
सबल प्रबल चल बह सदा, जैसे बहता...

छोड़ असंभव शब्द को, सब संभव है जान।
तू युवा यौवन भरा, निज शक्ति पहचान।

ओत-प्रोत तू यौवन से, है युवा देश प्राण।
उठ चलो आगे बढ़ो, कर यौवन बलिदान।

गज समान पग को बढ़ा, डिगा सके न कोय।
सतत एक सैम बढ़ सदा, बाधा विघ्न जो होय।
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# बिनोद कुमार यादव